Idgham (الإِدْغَام) का अर्थ है दाख़िल करना; पारिभाषिक रूप से यह साकिन अक्षर का मात्रा वाले अक्षर से ऐसे मिलना है कि दोनों दूसरे अक्षर की तरह का एक शद्दा वाला अक्षर बन जाएँ। इसके छह अक्षर يَرْمُلُون में इकट्ठा हैं, और यह दो प्रकार का है:
Idgham bi-Ghunnah
يَنْمُو में इकट्ठा चार अक्षरों में: Ya, Nun, Mim और Waw। Nun और Mim के साथ यह Idgham Kamil (الإِدْغَام الكَامِل) है, क्योंकि Nun और उसकी विशेषता दोनों ग़ायब हो जाते हैं और Ghunnah उस अक्षर का होता है जिसमें इदग़ाम हुआ। Waw और Ya के साथ यह Idgham Naqis (الإِدْغَام النَّاقِص) है, क्योंकि Nun ग़ायब हो जाता है पर उसकी विशेषता, Ghunnah, बाक़ी रहती है।
Idgham bila Ghunnah
दो अक्षरों, Lam और Ra' में। यह पूरा इदग़ाम है जिसमें Nun और Ghunnah दोनों ग़ायब हो जाते हैं।
इसकी शर्त और अपवाद
इदग़ाम के लिए दो शब्द ज़रूरी हैं। अगर साकिन Nun और Waw या Ya एक ही शब्द में हों, तो Izhar Mutlaq (الإِظْهَار المُطْلَق) ज़रूरी है ताकि शब्द दोहरे मूल से गड़बड़ न हो। ऐसा सिर्फ़ चार शब्दों में है: ﴿ٱلدُّنۡيَاۖالدُّنْيَاﵐ﴾ (Al-Baqarah 2:85), ﴿بُنۡيَٰنٞبُنْيَانٌ﴾ (As-Saf 61:4), ﴿قِنۡوَانٞقِنْوَانٌ﴾ (Al-An'am 6:99) और ﴿صِنۡوَانٞصِنْوَانٌ﴾ (Ar-Ra'd 13:4), जैसा कवि कहते हैं: "सिवाय एक शब्द के अंदर, जैसे dunya।"
अश शातिबिय्या के तरीक़ से हफ़्स में ये भी अपवाद हैं: ﴿يسٓ ١يٰسٓ ١﴾ (Ya-Sin 36:1) ﴿وَٱلۡقُرۡءَانِ ٱلۡحَكِيمِ ٢وَالْقُرْاٰنِ الْحَكِيْمِ ٢﴾ (Ya-Sin 36:2) और ﴿نٓۚ وَٱلۡقَلَمِنٓ وَالْقَلَمِ﴾ (Al-Qalam 68:1) का Nun, जो इज़हार के साथ पढ़े जाते हैं; और ﴿مَنۡۜ رَاقٖمَنْﶌ رَاقٍ﴾ (Al-Qiyamah 75:27) का Nun, उस पर Sakt (السَّكْت) होने के कारण।