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तजवीद के नियम

Mithlayn, Mutajanisayn और Mutaqaribayn

संकलन और संपादन: सैयद अब्दुल सलाम

मूल पाठ की विद्वानों द्वारा समीक्षा: डॉ. उज़्मा, इमाम सैयद सिराज मुनीर

यह अनुवाद विद्वानों द्वारा जाँचे गए अरबी, उर्दू और अंग्रेज़ी पाठ पर आधारित है।

अपडेट किया गया:

मुसहफ़ की लिपि:
रंगों की गाइड

क़ुरआन के उदाहरणों में सिर्फ़ वे अक्षर रंगे गए हैं जिन पर नियम लागू होता है; शब्द का बाक़ी हिस्सा काला रहता है। पूरी किताब में हर रंग का एक ही तय अर्थ है:

Ghunnah: Ikhfa', Iqlab, Idgham bi-Ghunnah, शद्दा वाला Nun और Mim
Izhar: Halqi, Shafawi, Qamari
वह अक्षर जो लिखा जाता है पर पढ़ा नहीं जाता, या बिना Ghunnah के पूरी तरह मिला दिया जाता है
Qalqalah
दो हरकत का Madd: Tabi'i, Badal, Silah Sughra, 'Iwad
चार या पाँच हरकत का Madd: Muttasil, Munfasil, Silah Kubra
छह हरकत का Madd Lazim
2, 4 या 6 हरकत का Madd: रुकने पर 'Arid li-s-Sukun और Lin
Tafkhim (भारी)
Tarqiq (हल्का)
उदाहरण में जिस अक्षर का अध्ययन हो रहा है
विशेष स्थितियाँ: Sakt, Imalah, Tashil, Ishmam
अल मुक़द्दिमा अल जज़रिय्या से
٥٠وَأَوَّلَيْ مِثْلٍ وَجِنْسٍ إِنْ سَكَنْأَدْغِمْ كَقُلْ رَبِّ وَبَلْ لَا وَأَبِنْ
٥١فِي يَوْمِ مَعْ قَالُوا وَهُمْ وَقُلْ نَعَمْسَبِّحْهُ لَا تُزِغْ قُلُوبَ فَالْتَقَمْ
अल मुक़द्दिमा अल जज़रिय्या से
٤٦وَبَيِّنِ الْإِطْبَاقَ مِنْ أَحَطتُّ مَعْبَسَطتَّ وَالْخُلْفُ بِنَخْلُقْكُّمْ وَقَعْ

जब लिखने और बोलने में दो अक्षर मिलते हैं, तो मख़रज और विशेषता में उनके संबंध के अनुसार उनके चार नाम हैं:

नामपरिभाषाउदाहरण
Mithlayn (المِثْلَان)मख़रज और विशेषताएँ एक: एक ही अक्षर दो बार﴿ٱضۡرِب بِّعَصَاكَاضْرِبْ بِّعَصَاكَ﴾ (Al-Baqarah 2:60)
Mutajanisayn (المُتَجَانِسَان)मख़रज एक, विशेषताएँ अलग﴿قَد تَّبَيَّنَقَدْ تَّبَيَّنَ﴾ (Al-Baqarah 2:256)
Mutaqaribayn (المُتَقَارِبَان)मख़रज या विशेषता में पास﴿وَقُل رَّبِّوَقُلْ رَّبِّ﴾ (Al-Isra 17:80)
Mutaba'idayn (المُتَبَاعِدَان)मख़रज में दूर, विशेषताएँ अलग﴿نَعۡبُدُنَعْبُدُ﴾ (Al-Fatihah 1:5)

हर एक के तीन प्रकार हैं: सग़ीर (छोटा) जब पहला साकिन और दूसरा मात्रा वाला हो; कबीर (बड़ा) जब दोनों मात्रा वाले हों; मुतलक़ जब पहला मात्रा वाला और दूसरा साकिन हो। हफ़्स में इदग़ाम ज़्यादातर सग़ीर में होता है; कबीर में असल नियम इज़हार है, कुछ शब्दों को छोड़कर; मुतलक़ में इदग़ाम नहीं होता।

Mithlayn Saghir

साकिन अक्षर को उसी तरह के मात्रा वाले अक्षर में मिलाना ज़रूरी है, एक शब्द में या दो शब्दों में, जैसा कवि कहते हैं: "दो एक जैसे या एक जिंस के अक्षरों में पहला अगर साकिन हो, तो इदग़ाम करो।"

एक जैसे अक्षरों को मिलाना
يُدۡرِككُّمُيُدْرِكْكُّمُ
An-Nisa 4:78
رَبِحَت تِّجَٰرَتُهُمۡرَبِحَتْ تِّجَارَتُهُمْ
Al-Baqarah 2:16
وَقَد دَّخَلُواْوَقَدْ دَّخَلُوْا
Al-Ma'idah 5:61
إِذ ذَّهَبَاِذْ ذَّهَبَ
Al-Anbya 21:87
بَل لَّابَلْ لَّا
Al-Fajr 89:17
عَصَواْ وَّكَانُواْعَصَوْا وَّكَانُوْا
Al-Baqarah 2:61
इदग़ाम वाला Lin Waw

अपवाद

  • जब पहला मद का अक्षर हो: इदग़ाम नहीं होता बल्कि खींचा जाता है, फिर दूसरा पढ़ा जाता है, जैसा कवि कहते हैं: "और fi yawm और qalu wa-hum में साफ़ पढ़ो": ﴿قَالُواْ وَهُمۡقَالُوْا وَهُمْ﴾ (Ash-Shu'ara 26:96) और ﴿فِي يَوۡمٖفِيْ يَوْمٍ﴾ (Al-Ma'arij 70:4)।
  • ﴿مَالِيَهۡۜمَالِيَهْ﴾ (Al-Haqqah 69:28) का सक्त वाला Ha', ﴿هَلَكَهَلَكَ﴾ (Al-Haqqah 69:29) के साथ: मिलाकर पढ़ने में हफ़्स के दो तरीक़े हैं: हल्के Sakt (السَّكْت) के साथ इज़हार, या इदग़ाम।

Mutajanisayn Saghir

हफ़्स में इन स्थितियों में इदग़ाम होता है और बाक़ी जगह साफ़ पढ़ा जाता है:

अक्षरउदाहरणप्रकार
ت ← د﴿أُجِيبَت دَّعۡوَتُكُمَااُجِيْبَتْ دَّعْوَتُكُمَا﴾ (Yunus 10:89) ﴿أَثۡقَلَت دَّعَوَااَثْقَلَتْ دَّعَوَا﴾ (Al-A'raf 7:189)पूरा
ت ← ط﴿وَقَالَت طَّآئِفَةٞوَقَالَتْ طَّآئِفَةٌ﴾ (Ali 'Imran 3:72) ﴿وَدَّت طَّآئِفَةٞوَدَّتْ طَّآئِفَةٌ﴾ (Ali 'Imran 3:69)पूरा
د ← ت﴿قَد تَّبَيَّنَقَدْ تَّبَيَّنَ﴾ (Al-Baqarah 2:256) ﴿عَبَدتُّمۡعَبَدْتُّمْ﴾ (Al-Kafirun 109:4)पूरा
ث ← ذ﴿يَلۡهَثۚ ذَّٰلِكَيَلْهَثْﵧ ذٰلِكَ﴾ (Al-A'raf 7:176)पूरा
ذ ← ظ﴿إِذ ظَّلَمُوٓاْاِذْ ظَّلَمُوْٓا﴾ (An-Nisa 4:64)पूरा
ب ← م﴿ٱرۡكَب مَّعَنَاارْكَبْ مَّعَنَا﴾ (Hud 11:42)पूरा
ط ← ت﴿بَسَطتَبَسَطْتَّ﴾ (Al-Ma'idah 5:28) ﴿أَحَطتُاَحَطْتُّ﴾ (An-Naml 27:22) ﴿فَرَّطتُمۡفَرَّطْتُّمْ﴾ (Yusuf 12:80)अधूरा: Ta' का Itbaq और Isti'la' बाक़ी रहता है
आम ग़लती
﴿بَسَطتَبَسَطْتَّ﴾ (Al-Ma'idah 5:28) और ﴿أَحَطتُاَحَطْتُّ﴾ (An-Naml 27:22) में Ta' का ऐसा पूरा इदग़ाम करना कि वह शुद्ध Ta बन जाए, या उसे क़लक़ला के साथ साफ़ पढ़ना ग़लती है। सही तरीक़ा है शद्दा वाला Ta जिसमें Ta' का Itbaq बाक़ी रहे, जैसा कवि कहते हैं: "ahattu और basatta में Itbaq ज़ाहिर करो।"

Mutaqaribayn Saghir

हफ़्स में: साकिन Lam, Ra' में मिल जाता है, जैसे ﴿وَقُل رَّبِّوَقُلْ رَّبِّ﴾ (Al-Isra 17:80) और ﴿بَل رَّفَعَهُۢبَلْ رَّفَعَهُ﴾ (An-Nisa 4:158), सिवाय ﴿بَلۡۜ رَانَبَلْﶌ رَانَ﴾ (Al-Mutaffifin 83:14) के, सक्त के कारण। साकिन Qaf, ﴿نَخۡلُقكُّمنَخْلُقْكُّمْ﴾ (Al-Mursalat 77:20) में Kaf में मिल जाता है, दो तरीक़ों से: पूरा इदग़ाम, जो बेहतर है, और अधूरा इदग़ाम जिसमें Qaf का Isti'la' बाक़ी रहे, जैसा कवि कहते हैं: "और nakhluqkum में मतभेद हुआ।" साकिन Nun का Lam और Ra' में मिलना भी इसी में आता है।

जहाँ साफ़ पढ़ना ज़रूरी है

कवि ने उन शब्दों से सावधान किया जहाँ अक्षर पास होने के कारण इदग़ाम घुस सकता है; इन्हें साफ़ पढ़ना चाहिए:

Izhar
قُلۡ نَعَمۡقُلْ نَعَمْ
As-Saffat 37:18
فَسَبِّحۡهُفَسَبِّحْهُ
Qaf 50:40
لَا تُزِغۡ قُلُوبَنَالَا تُزِغْ قُلُوْبَنَا
Ali 'Imran 3:8
فَٱلۡتَقَمَهُفَالْتَقَمَهُ
As-Saffat 37:142
अन्य उदाहरण (काव्य से नहीं)
فَقَدۡ ضَلَّفَقَدْ ضَلَّ
An-Nisa 4:116
قَدۡ سَمِعَقَدْ سَمِعَ
Al-Mujadila 58:1

हफ़्स में कबीर प्रकार

हफ़्स में कबीर प्रकार में असल नियम इज़हार है; इदग़ाम कुछ शब्दों में होता है, जैसे ﴿لَا تَأۡمَ۬نَّالَا تَاْمَنَّا﴾ (Yusuf 12:11), Ishmam (الإِشْمَام) या Rawm (الرَّوْم) के साथ जैसा आगे समझाया गया है, ﴿مَا مَكَّنِّيمَا مَكَّنِّيْ﴾ (Al-Kahf 18:95), ﴿فَنِعِمَّافَنِعِمَّا﴾ (Al-Baqarah 2:271) और ﴿أَتُحَٰٓجُّوٓنِّياَتُحَآجُّوْٓنِّيْ﴾ (Al-An'am 6:80)।

स्रोत: Ibn al-Jazari, al-Muqaddimah al-Jazariyyah, शेर 46 से 51; Ibn al-Jazari, an-Nashr fi al-Qira'at al-'Ashr: باب الإدغام الصغير; Makki ibn Abi Talib, ar-Ri'ayah li-Tajwid al-Qira'ah: باب الإدغام; Al-Marsafi, Hidayat al-Qari ila Tajwid Kalam al-Bari: المثلان والمتجانسان والمتقاربان.